नई दिल्ली, 19 जनवरी 2026: राजस्थान में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयानों पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह पुराना स्वभाव बन चुका है कि बिना तथ्य और प्रमाण के मनगढ़ंत आरोप लगाकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जाए। अफवाह और अनर्गल बयानबाजी अब कांग्रेस की राजनीति का स्थायी हिस्सा बन चुकी है।
मदन राठौड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एसआईआर यानी मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कोई नई प्रक्रिया नहीं है। यह प्रक्रिया कांग्रेस के शासनकाल में भी कई बार अपनाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में पहली बार एसआईआर कराया गया था। इसके बाद 2002, 2003 और 2004 में भी विभिन्न राज्यों में कांग्रेस सरकारों के दौरान मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण हुआ। ऐसे में आज इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाना कांग्रेस की दोहरी मानसिकता और राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एसआईआर का एकमात्र उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत करना है। इस प्रक्रिया के तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि देश का प्रत्येक पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल हो और मृत व्यक्तियों, डुप्लीकेट मतदाताओं या अपात्र लोगों के नाम सूची से हटाए जाएं। इसमें किसी जाति, धर्म, वर्ग या मजहब के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता। यह पूरी तरह चुनाव आयोग द्वारा निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की जाने वाली संवैधानिक प्रक्रिया है।
राठौड़ ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी को अब अपना जनाधार खिसकने का डर सता रहा है, इसलिए वह हर संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस देश के नागरिक नहीं हैं, जिनका नाम दो जगह दर्ज है या जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनके नाम मतदाता सूची से हटाने में कांग्रेस को आपत्ति क्यों है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह फर्जी मतदाताओं का समर्थन क्यों कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष द्वारा भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं और केंद्रीय नेतृत्व पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं। देश के गृह मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने एसआईआर को लेकर न तो कोई बयान दिया है और न ही किसी प्रकार का निर्देश। वे अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के तहत राजस्थान आए थे, लेकिन कांग्रेस को हर जगह काल्पनिक साजिशें दिखाई देने लगती हैं।
मदन राठौड़ ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि डोटासरा आजकल यह मानकर चल रहे हैं कि देश में होने वाली हर प्रक्रिया और हर गतिविधि उन्हीं को लक्ष्य बनाकर की जा रही है। यह उनकी राजनीतिक हताशा और मानसिक असंतुलन का परिचायक है। कांग्रेस के पास न तो कोई ठोस मुद्दा बचा है और न ही जनता के सामने रखने के लिए कोई सकारात्मक एजेंडा, इसलिए वह भ्रम और अफवाह का सहारा ले रही है।
इस दौरान राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने भी कांग्रेस के आरोपों की निंदा की। उन्होंने कहा कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया कानून के तहत निर्धारित है। किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो, आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है और हर आपत्ति की विधिवत जांच की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में फॉर्म जमा होने की बातें कही जा रही हैं, लेकिन सभी फॉर्म की जांच होगी और केवल वास्तविक मतदाता की ही पुष्टि की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यह वही पार्टी है जो चुनाव हारते ही ईवीएम, चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगती है। ईवीएम कांग्रेस की ही देन है और एसआईआर भी कांग्रेस शासनकाल में होता रहा है, लेकिन अब सत्ता में न होने के कारण कांग्रेस इसे मुद्दा बना रही है।
प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि अगर कांग्रेस को बहस करनी है तो वह विधानसभा में आए। भाजपा सरकार अपने दो साल के कार्यकाल की तुलना कांग्रेस के पांच साल के शासन से करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता, सुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ काम कर रही है और जनता के विश्वास पर पूरी तरह खरी उतरेगी।





