Sadhvi Prem Baisa Death: पिता ट्रक चालक, 2 साल में मां की मौत, पूरी कहानी

Sadhvi Prem Baisa की जोधपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने राजस्थान में सनसनी मचा दी है… जोधपुर/राजस्थान।राजस्थान के जोधपुर में चर्चित बाल साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी है। भजन, कथा और आध्यात्मिक प्रवचनों से पहचान

EDITED BY: Mehra Rajesh Kumar

UPDATED: Thursday, January 29, 2026

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Sadhvi Prem Baisa की जोधपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने राजस्थान में सनसनी मचा दी है…

जोधपुर/राजस्थान।
राजस्थान के जोधपुर में चर्चित बाल साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी है। भजन, कथा और आध्यात्मिक प्रवचनों से पहचान बनाने वाली साध्वी के निधन के बाद उनके समर्थकों और कई जनप्रतिनिधियों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। देर रात उनके आश्रम के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और मामले की सच्चाई सामने लाने की मांग की।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जोधपुर के पाल रोड स्थित साधना कुटीर आश्रम में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

परेऊ गांव से अध्यात्म की राह तक

बाल साध्वी प्रेम बाईसा मूल रूप से बालोतरा जिले के परेऊ गांव की रहने वाली थीं। उनके पिता विरमनाथ पेशे से ट्रक चालक हैं, जबकि माता अमरू बाईसा गृहणी थीं। महज दो साल की उम्र में मां के निधन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। परिवार के अनुसार, बचपन से ही उनमें भक्ति और अध्यात्म के प्रति गहरी रुचि दिखाई देने लगी थी।

इसके बाद उनके पिता उन्हें जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम लेकर गए, जहां संत राजाराम जी महाराज और कृपाराम जी महाराज के सान्निध्य में उन्होंने भजन, कथा वाचन और धार्मिक शिक्षा ग्रहण की। यहीं से उनकी पहचान एक बाल साध्वी के रूप में बनने लगी।

लोकप्रियता और अलग पहचान

समय के साथ प्रेम बाईसा की भागवत कथा और भजन लोगों के बीच लोकप्रिय होते गए। सोशल मीडिया पर भी उनके प्रवचन और भजन बड़ी संख्या में देखे जाने लगे। बढ़ती पहचान के बाद वे गुरुकृपा आश्रम से अलग होकर जोधपुर के पाल रोड क्षेत्र में साधना कुटीर आश्रम में रहने लगीं।

इस आश्रम के उद्घाटन अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव सहित कई प्रसिद्ध संत और अनुयायी मौजूद रहे थे। इसके अलावा, पैतृक गांव परेऊ में भी उन्होंने एक आश्रम का निर्माण कराया, जहां नियमित धार्मिक आयोजन और कथाएं होती थीं।

विवादों में भी आया नाम

हालांकि आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ उनका नाम कुछ विवादों से भी जुड़ा। पैतृक गांव में जमीन विवाद को लेकर परिजनों के साथ मामला सामने आया, जो पुलिस तक पहुंचा। इसके अलावा, कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर भी चर्चा हुई थी, जिस पर साध्वी प्रेम बाईसा ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी। उस मामले में पुलिस द्वारा कार्रवाई भी की गई थी।

सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा रहस्य

मौत के बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से सामने आई एक पोस्ट ने समर्थकों के बीच सवाल खड़े कर दिए। पोस्ट में सनातन धर्म के प्रति समर्पण और न्याय की उम्मीद का जिक्र किया गया था। हालांकि पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि पोस्ट किस परिस्थिति में और किसने साझा की।

जांच की मांग तेज

घटना के बाद आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल सहित कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल बाल साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को लेकर कई सवाल अनुत्तरित हैं। प्रशासन और पुलिस ने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की गहराई से जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी।